वह माँ ही ह जो सभी हर परिस्तिथियों में खुस रहे ,इसी की दुआ भी करती हे और भरपूर कोसिस भी |

वह माँ ही ह जो सभी हर परिस्तिथियों में  खुस रहे ,इसी की दुआ भी करती हे और भरपूर कोसिस भी |                                                                          यह भी पड़े  मंजिल दूर और सफ़र बहुत है . छोटी सी जिन्दगी की फिकर बहुत है . मार डालती ये दुनिया कब की हमे . लेकिन “माँ” की दुआओं में असर बहुत है .                                                                

कुंदरू सब्जी क्या बनाऊ ?’ पतिदेव को चाय का कप पकड़ते हुए मेने पूछा | सर्दियों में सुबह दूसरी चाय होते-होते दस बज जाते ह और नास्ता – वास्ता एक तरफ ,सीधे दोपहर के खाने पर आ जाओ ,तो ठीक  वार्ना शाम की चाय तक चोक -चूल्हे में पसे रहो |पतिदेव के लिए ये कठिन प्रसन हे जानते हुए भी पूछा, क्यूंकि रोज वाली शादियों के कारन आजकल उनके भी नखरे बढ़ गए हे |ये चीजे गैस करती हे ,उससे एसिडिटी होती हे और ये तो इस हफ्ते में तीसरी बार बानी हे ,ये सब सुनकर मूड ऑफ नहीं करना हे मुझे |                                             ‘क्या -क्या रखा हे ?’ उन्होंने अख़बार में नजरे गड़ाए हुए पूछा |     ज्यादा कुछ नहीं ,वही फूल गोभी , पत्ता गोभी लेकिन  हा अनीता क घर से कुंदरू आये हे ‘ मुझे यद् आया  ‘अरे तो फिर क्या पूछना .बस कुंदरू बनाओ ,अच्छे कुरकुरे और सादी दाल ‘ ‘ हा ये ठीक सही रहेगा ,लकिन ….यद् आया साहबजादे नहीं खाएंगे कुंदरू !’                                                                                                                                                                         यह भी पड़े   मजेदार कहानी :  बीरबल का रंग- रूप                                                                                                         

‘तो उनके लिए फूल गोभी बना देना इन्होने  सलाह दी |कल सुबह फूल गोभी बना था ,शाम  को पत्ता गोभी .कोचिंग के चक्कर में हमारे साथ  सादी  में नहीं गया था ,अब फिर से वे सब देखकर वह मुँह बांयेगा ,में सोचें लगी |’और फिर कुंदरू में क्या परेशानी हे ?बढ़िया तो लगते हे ,दी सब्जी का झंझट पलने की जरुरत क्या हे ?इनकी आदत सुधारो ‘इन्होने आवाज देकर कहा |वो यहॉ नहीं रुके ,मुझे भी पता था अब मौका मिला हे ,इतनी जल्दी चुप थोड़ी हो जायेंगे |’चार -पांच महीने बाद हॉस्टल जाना हे वह जो मिलेगा खाना पड़ेगा ,फिर क्या करेंगे?हमारे घर तो यह सब नखरे कभी नहीं चले, जो बना हे वही खाओ नहीं तो अचार दाल से काम चलाओ ‘सुनकर जो मन  आया कह दू , तुम साथ भाई -बहन थे ,तुम्हारी माताजी तो  सारी ज़िन्दगी यही सुनती रही की  सुबह चार बजे उठाकर चूल्हे पर चाय से पहले दाल और आलू चढ़ा देती थी की सात बजे तक जो बच्चे भूखे हो जायेंगे ,लेकिन यह सोचकर रोक लिए की कौन छुट्टी के दिन लड़ाई  लगाए |जवाब नहीं देंगे तो मुँह तो फूल जायेगा साहब का |फिर लगा बात तो उनकी भी सही हे |बाहरवीं के बहार तो भेजना ही हे , फिर खाना पीना रहना सोना हर चीज में समझौता करना पड़ेगा |मेने खुद ने हो तो हॉस्टल में बारिश के मौसम में मेसबॉय को निस्पृह भाव से इल्ली वाली गिलकी ,बैंगन काटते देखकर अंडा खाना सुरु कर दिया था | बिलकुल सही काह रहे हे ,बदलाव की सुरुवात घर से ही होती हे |चिड़चिड़ायेगा तो समझा लुंगी .तय करके उठी ही थी की बिटिया का फ़ोन आ गया |इसे भी क्या कहु ,अभी सारा काम पड़ा हे , चलो बिटिया पहले हे |घर से दूर पीजी में रह रही हे पहले उसकी सुन लू |थोड़ी देर यहाँ वह की बातों के बाद में अपने रोज के सवालों पर आगई ‘कल टिफिन में क्या आया था ?”गिलके की सब्जी रोटी दाल -चावल उसने सहज भाव से बताया |’अरे फिर तूने क्या खाया दाल चावल?  फिर मेने पूछा |’खा ली थी गिलकी की सब्जी से रोटी भी |रोज अचार और अंडे भी कहा तक खाएंगे ,वैसे ठीक लग रही थी  ,जब घर आउंगी तो आपके हाथ की भी खाउंगी ‘बेटी ने बताय थोड़ी बहुत बातचीत के बाद फ़ोन वार्ता समाप्त हो गई ,पर मेरा मन दुखी होगया | यहां थी तो गिलकी क तरफ मुड़ने भी नहीं देती थी |उसका तर्क भी जबरजस्त होता था ,’आप बनाओगी फिर में नहीं खाउंगी ,फिर पापा आधे घंटे तक भासन देंगे   की ये खाना किये वो खाना चाइये ,वो खाना चाइये वैसे भी गिलकी में कोई विषेस प्रोटीन -विटामिन होते हे असा मेने कही नहीं  पड़ा |’यद् करके मुझे उदासी के बिच में भी हसी आगई , तभी नजर कुंदरू की डालियो पर गई |चार  -पांच महीने बाद मेरा लाडला  भी इसी तरह मनमरकार समझौता करेगा |इतने  में ही दरवाजे की घंटी बजी ,पड़ोस का राहुल पापड़ वाले बेलन लौटने आया था |’ साईकिल से ? मेने पूछा ‘आंटी  दूध क पैकेट लेने जरा था ….’एक पल में  दिमाग में बिजली सी कौंधी और मेने कहा ,’रुक पैसे  देती हु ,मुझे भी छह अंडे  ला देना ‘ पतिदेव चाय का कप रखने किचन में आये तो में मसाला पीस रही थी  ‘तुम कुंदरू पइसे मसाले में बना राइ हो हो ?’ मुझे मसाला पिस्टे देखकर पूछा | ‘अरे नहीं, शेर  के लिए अंडा  करि  बना देती हु | मतलब छह अंडे की बना राइ हु , आपको भी हो जाएगी ‘मेने सिटपिटाते हुए कहा |’में नहीं खाऊंगा ,में कुंदरू ही खाऊंगा उन्हीने आंखे टेर्री | ‘हा  तो ठीक हे| आपके लिए कुंदरू भी बन जायँगे , बस आप काटना सुरु करो में मसाला भुनने रखकर अभी आयी ‘ मेने लीपा पोती करने की कोसिस की ‘लाड में सड़ा रखा हे’ उन्होंने कुंदरू की डालिये और चाकू उठाते हुए कहा | ‘देखो मेरे लाड में सड़ने वालों की लिस्ट में आपका नाम अभी भी सबसे ऊपर हे ‘ मेने अपनी प्राइज मीनिंग हमेसा की आजमाई हुई तथा हमेसा ही कारगर साबित रहने वालीं मुस्कान बिखेरते हुए कहा‘तो उनके लिए फूल गोभी बना देना इन्होने  सलाह दी |कल सुबह फूल गोभी बना था ,शाम  को पत्ता गोभी .कोचिंग के चक्कर में हमारे साथ  सादी  में नहीं गया था ,अब फिर से वे सब देखकर वह मुँह बांयेगा ,में सोचें लगी |’और फिर कुंदरू में क्या परेशानी हे ?बढ़िया तो लगते हे ,दी सब्जी का झंझट पलने की जरुरत क्या हे ?इनकी आदत सुधारो ‘इन्होने आवाज देकर कहा |वो यहॉ नहीं रुके ,मुझे भी पता था अब मौका मिला हे ,इतनी जल्दी चुप थोड़ी हो जायेंगे |’चार -पांच महीने बाद हॉस्टल जाना हे वह जो मिलेगा खाना पड़ेगा ,फिर क्या करेंगे?हमारे घर तो यह सब नखरे कभी नहीं चले, जो बना हे वही खाओ नहीं तो अचार दाल से काम चलाओ ‘सुनकर जो मन  आया कह दू , तुम साथ भाई -बहन थे ,तुम्हारी माताजी तो  सारी ज़िन्दगी यही सुनती रही की  सुबह चार बजे उठाकर चूल्हे पर चाय से पहले दाल और आलू चढ़ा देती थी की सात बजे तक जो बच्चे भूखे हो जायेंगे ,लेकिन यह सोचकर रोक लिए की कौन छुट्टी के दिन लड़ाई  लगाए |जवाब नहीं देंगे तो मुँह तो फूल जायेगा साहब का |फिर लगा बात तो उनकी भी सही हे |बाहरवीं के बहार तो भेजना ही हे , फिर खाना पीना रहना सोना हर चीज में समझौता करना पड़ेगा |मेने खुद ने हो तो हॉस्टल में बारिश के मौसम में मेसबॉय को निस्पृह भाव से इल्ली वाली गिलकी ,बैंगन काटते देखकर अंडा खाना सुरु कर दिया था | बिलकुल सही काह रहे हे ,बदलाव की सुरुवात घर से ही होती हे |चिड़चिड़ायेगा तो समझा लुंगी .तय करके उठी ही थी की बिटिया का फ़ोन आ गया |इसे भी क्या कहु ,अभी सारा काम पड़ा हे , चलो बिटिया पहले हे |घर से दूर पीजी में रह रही हे पहले उसकी सुन लू |थोड़ी देर यहाँ वह की बातों के बाद में अपने रोज के सवालों पर आगई ‘कल टिफिन में क्या आया था ?”गिलके की सब्जी रोटी दाल -चावल उसने सहज भाव से बताया |’अरे फिर तूने क्या खाया दाल चावल?  फिर मेने पूछा |’खा ली थी गिलकी की सब्जी से रोटी भी |रोज अचार और अंडे भी कहा तक खाएंगे ,वैसे ठीक लग रही थी  ,जब घर आउंगी तो आपके हाथ की भी खाउंगी ‘बेटी ने बताय थोड़ी बहुत बातचीत के बाद फ़ोन वार्ता समाप्त हो गई ,पर मेरा मन दुखी होगया | यहां थी तो गिलकी क तरफ मुड़ने भी नहीं देती थी |उसका तर्क भी जबरजस्त होता था ,’आप बनाओगी फिर में नहीं खाउंगी ,फिर पापा आधे घंटे तक भासन देंगे   की ये खाना किये वो खाना चाइये ,वो खाना चाइये वैसे भी गिलकी में कोई विषेस प्रोटीन -विटामिन होते हे असा मेने कही नहीं  पड़ा |’यद् करके मुझे उदासी के बिच में भी हसी आगई , तभी नजर कुंदरू की डालियो पर गई |चार  -पांच महीने बाद मेरा लाडला  भी इसी तरह मनमरकार समझौता करेगा |इतने  में ही दरवाजे की घंटी बजी ,पड़ोस का राहुल पापड़ वाले बेलन लौटने आया था |’ साईकिल से ? मेने पूछा ‘आंटी  दूध क पैकेट लेने जरा था ….’एक पल में  दिमाग में बिजली सी कौंधी और मेने कहा ,’रुक पैसे  देती हु ,मुझे भी छह अंडे  ला देना ‘ पतिदेव चाय का कप रखने किचन में आये तो में मसाला पीस रही थी  ‘तुम कुंदरू पइसे मसाले में बना राइ हो हो ?’ मुझे मसाला पिस्टे देखकर पूछा | ‘अरे नहीं, शेर  के लिए अंडा  करि  बना देती हु | मतलब छह अंडे की बना राइ हु , आपको भी हो जाएगी ‘मेने सिटपिटाते हुए कहा |’में नहीं खाऊंगा ,में कुंदरू ही खाऊंगा उन्हीने आंखे टेर्री | ‘हा  तो ठीक हे| आपके लिए कुंदरू भी बन जायँगे , बस आप काटना सुरु करो में मसाला भुनने रखकर अभी आयी ‘ मेने लीपा पोती करने की कोसिस की ‘लाड में सड़ा रखा हे’ उन्होंने कुंदरू की डालिये और चाकू उठाते हुए कहा | ‘देखो मेरे लाड में सड़ने वालों की लिस्ट में आपका नाम अभी भी सबसे ऊपर हे ‘ मेने अपनी प्राइज मीनिंग हमेसा की आजमाई हुई तथा हमेसा ही कारगर साबित रहने वालीं मुस्कान बिखेरते हुए कहा                                                                                                                                                                      pic gotam chakarwati                                                                                                                                        story nivedita sharma

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